चार मोमबत्ति – एक प्रेरणादायी अवधि कथा
देवानन्द ठाकुर
रात कय समय रहा , चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा, नज़दीक कय एक कमरा महिया चार मोमबत्ति जलत रहा । एकांत पाय कय आज वै एक दुसरे से दिल कय बात करत रही।
पहिला मोमबत्ती बोली, ” हम शांति होई , लेकिन हमे लगत हय , अब ई दुनिया का हमार ज़रुरत नाई हय। हर तरफ आपाधापी अव लूट-मार मची हय। हम यहाँ अब और धेरै तक नाई रहि सकित हन। …” और ऐसन कहत , कुछ देर महिया ऊ मोमबत्ती बुझ गय।
दूसरका मोमबत्ती बोलिस ” हम विश्वास होई, अव हमे लगत हय झूठ अव फरेब कय बीच हमार भी यहाँ काउनो ज़रुरत नाई हय।हम भी यहाँ से जाइत हन…” , अव दूसर वाला मोमबत्ती भी बुझाय जात हय।
तीसरा मोमबत्ती भी दुखी होएके बोला , ” हम प्रेम होइ,। हमरे पास जलत रहैक ताकत हय। पर आज हर कोई इतना व्यस्त हय, कि हमरे लिए केहु कय पास वक्त ही नाई हय। दूसर से तो दूर लोग अपनेन से भी प्रेम करैक भूलाय जात हय। हम ये सब आउर नाई सह सकित हन।
हम भी इ दुनिया से जाईत हन….” अव ऐसन कहत तीसर मोमबत्ती भी बुझाय गय।
तब एक मासूम बच्चा उ कमरे महिया गवा। मोमबत्तिका बुझात देखत ऊ घबराय गवा।वकरे आँख से आंस टपकय लाग अव वह रुंआसा होत बोलिस “अरे, तोहरे (मोमबत्ति) जलत काहे नाई हल। तोहरेन का तो अंत तक जलैक रहा ! तोहरे यह मेर बीच में हम्मे कैसे छोड़ कय जा सकत हव?”
तब चौथा मोमबत्ती बोलीस, ”प्यारे बच्चे घबराओ ना, हम आशा होइ अव जब तक हम जलित हन तब हम बाकी मोमबत्ति का फिर से जला सकित हन। “
ई सुनकय बच्चे कय आँख चमक उठा अव उ आशा कय बल पे शांति, विश्वास, अव प्रेम का फिर से प्रकाशित कय दिहिस। जब सबकुछ बुरा होत दिखाय। चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार नज़र आवै । तो आपन लोग भी पराया लागै लागें तो भी उम्मीद न छोडाजाय।….आशा ना छोडा जाय।, काहे से कि आशा मे इतना शक्ति हय कि ई हर एक हराल चीज भी आपका वापस दै सकत हय। अपने आशा कय मोमबत्ती का जलाये रख्खा रहा जाय, बस अगर ई जलत रही तो आप काउनो भी आउर मोमबत्ती का प्रकाशित कय सकत हय।
