शहरिन से पुरवा बही ..

सेयर गर्नुहोस

“अवधी दाेहा “

शहरिन से पुरवा बही
पहुंची हमरे गांव
बिसरे राम जोहार अब
टोकैं लय लय नाव ,

शीतलता जल से गयी
बानिस् गयी मिठास
कुंवक् जगति से गयि उजरि
पुजनी दुबिया घास,

कौआ उड़ा बंडेर से
अबहीं लउटा नाय
होइगा सौदा प्रेम कै ,
अंखियौ फरकत नाय ,

न बाबा के कांध पर
नाती होत सवार
न आजी के खूंट मा
रहिगा बंधा परिवार ,

अब ढेबरी का बारि कै
के जोरत है हाथ
ढेबरी से तव आज कल
कोठरी है करखात ,

लयिगै पुरवा छोरि कै
चना,चबैना,भार
दूध दहिव अस काल भा
अहिरिन बनी सोनार !!

           - संजय अवधी , गोंडा (भारत)
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